जिंदगी …ये मेरी जिंदगी…।
एक तूफ़ान लेकर चल रही ,
फिर भी बहुत शांत है …ये मेरी जिंदगी ।
कहानियां कुछ अजीब सी लेकर ढो रही है ये मेरी जिंदगी ,
जो लोगो ने, समाज ने ,मुझे सुनाये या फिर दिखाए ,
ये जिंदगी उन कहानियों को लेकर ढो रही है ,
या फिर उन्हें संजो कर, समेट कर रखी है ये मेरी जिंदगी …
जब जब कोई परेशानी होती या फिर आराम महसूस होता ,
जिंदगी यादो के लाइब्रेरी में जाती ,
उन कहानियों को फिर से पढ़ती ,देखती, सुनती …
फिर उन यादों को पलट कर रख देती … ये मेरी जिंदगी …
प्रेरणा लेती, सबक लेती,अंत में हिसाब मांगती ये जिंदगी
उन बीते लम्हों से ,उन बीते रश्मो से ,
क्या है ये सब ,क्या है ये रुख ,
जब भी सिर उठाता हूँ तो हार मानती है … ये मेरी जिंदगी …
खुशियाँ लोगो से उधार मांगती ये जिंदगी ,
अपनों से ही एक पल सुख खातिर पनाह मांगती ,
जिंदगी हंसती भी है भी रोती भी है
अन्दर से बहुत ख़ुश है , फिर भी उदास है …ये मेरी जिंदगी ।
आज भी खुद को मै उस नदी के किनारे पाता हूँ ,
जहाँ रेत का टीला खड़ा करने को ,
बहुत बेक़रार एक बच्चा ,कोशिश किये जा रहा है ,
मगर सब अंत में गिर ही जाते जो जरा सा गलती किया …
शायद अब भी वही रेत का टीला मेरी जिंदगी में है,
जो गिरता रहता है मेरे लाख सँभालने के बाद भी …
अब फिर मै उस नदी से वापस अपने घर की राह पर चल पड़ा ,
जिस घर को मै शाम होने पर मंजिल मानता ,
वो मंजिल ही मेरे रेत के टीले के बिखरने पर भी सुकून देता ,
क्यूंकि अगली सुबह मुझे फिर मुझे उन हादसों से गुजरना है
जिस से मै अभी गुजर रहा हूँ …
फिलहाल …अभी किसी का उधार है जिंदगी … ये मेरी जिंदगी,
अभी तो उधारी का सूद ही नहीं चुका पाया ,
वादा करता हूँ आपका भी कोई उधार होगा तो चुका के ही दम लेगी जिंदगी …
...ये मेरी जिंदगी।
एक तूफ़ान लेकर चल रही ,
फिर भी बहुत शांत है …ये मेरी जिंदगी ।
कहानियां कुछ अजीब सी लेकर ढो रही है ये मेरी जिंदगी ,
जो लोगो ने, समाज ने ,मुझे सुनाये या फिर दिखाए ,
ये जिंदगी उन कहानियों को लेकर ढो रही है ,
या फिर उन्हें संजो कर, समेट कर रखी है ये मेरी जिंदगी …
जब जब कोई परेशानी होती या फिर आराम महसूस होता ,
जिंदगी यादो के लाइब्रेरी में जाती ,
उन कहानियों को फिर से पढ़ती ,देखती, सुनती …
फिर उन यादों को पलट कर रख देती … ये मेरी जिंदगी …
प्रेरणा लेती, सबक लेती,अंत में हिसाब मांगती ये जिंदगी
उन बीते लम्हों से ,उन बीते रश्मो से ,
क्या है ये सब ,क्या है ये रुख ,
जब भी सिर उठाता हूँ तो हार मानती है … ये मेरी जिंदगी …
खुशियाँ लोगो से उधार मांगती ये जिंदगी ,
अपनों से ही एक पल सुख खातिर पनाह मांगती ,
जिंदगी हंसती भी है भी रोती भी है
अन्दर से बहुत ख़ुश है , फिर भी उदास है …ये मेरी जिंदगी ।
आज भी खुद को मै उस नदी के किनारे पाता हूँ ,
जहाँ रेत का टीला खड़ा करने को ,
बहुत बेक़रार एक बच्चा ,कोशिश किये जा रहा है ,
मगर सब अंत में गिर ही जाते जो जरा सा गलती किया …
शायद अब भी वही रेत का टीला मेरी जिंदगी में है,
जो गिरता रहता है मेरे लाख सँभालने के बाद भी …
अब फिर मै उस नदी से वापस अपने घर की राह पर चल पड़ा ,
जिस घर को मै शाम होने पर मंजिल मानता ,
वो मंजिल ही मेरे रेत के टीले के बिखरने पर भी सुकून देता ,
क्यूंकि अगली सुबह मुझे फिर मुझे उन हादसों से गुजरना है
जिस से मै अभी गुजर रहा हूँ …
फिलहाल …अभी किसी का उधार है जिंदगी … ये मेरी जिंदगी,
अभी तो उधारी का सूद ही नहीं चुका पाया ,
वादा करता हूँ आपका भी कोई उधार होगा तो चुका के ही दम लेगी जिंदगी …
...ये मेरी जिंदगी।
